सूर्य ग्रहण को कब और कहां देख सकते हैं कुछ ही देर में लगने वाला हैं ग्रहण

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सू्र्य ग्रहण अब से कुछ देर में लग जाएगा। सुबह 9.16 बजे से सूर्य ग्रहण लगेगा। हालांकि, भारत में ये सुबह 10 के बाद ही दिखाई देगा। ये साल का पहला और आखिरी सूर्य ग्रहण है। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में चंद्रमा, सूर्य को 98.6% तक ढक देगा, जिससे ये कंगन जैसी आकृति का दिखाई देगा। ज्योतिषशास्त्रों में इसे कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहा गया है। ये आकृति ज्यादातर स्थानों पर 11.50 से 12.10 के बीच दिखाई देगी।

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सबसे पहले मुंबई और पुणे में 10.01 बजे से दिखना शुरू होगा। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत में 10.03 बजे से दिखना शुरू होगा। अन्य देशों में ये ग्रहण पूरी तरह 3.04 बजे खत्म होगा। ये देश में कई जगहों पर खंडग्रास (आंशिक) सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। भारत के अलावा ये ग्रहण नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कांगो में दिखाई देगा। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को भारत में दिखेगा।

ज्योतिष शास्त्री ग्रहण के करीब 12 घंटे पहले सूतक काल ( Sutak Timing ) मानते हैं। इसका मतलब है कि सूतक काल भारत में 12 घंटे पहले 20 जून रात करीब 10 बजे से शुरू हो चुका है। यह ग्रहण खत्म होने तक रहेगा। 10 बजे सूतक काल लगते ही मंदिरों के पट बंद हो गए। भुज भारत का पहला शहर होगा जहां ग्रहण की शुरुआत सुबह 9:58 बजे होगी। इसके बाद ग्रहण सूतककाल समाप्त होने पर लोग फिर मंदिर और पूजा घरों को खोलते हैं, मूर्तियों में गंगाजल छिड़कर उन्हें पवित्र करते हैँ और विधिवित पूजा पाठ पहले की तरह शुरू करते हैं।

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21 जून को सुबह 9:15 बजे ग्रहण शुरू हो जाएगा और 12:10 बजे दोपहर में पूर्ण ग्रहण दिखेगा। इस दौरान कुछ देर के लिए हल्का अंधेरा सा छा जाएगा। इसके बाद 03:04 बजे ग्रहण समाप्त होगा। यानी करीब 6 घंटे का लंबा ग्रहण होगा। लंबे ग्रहण की वजह से पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। देश की राजधानी दिल्ली में सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10:20 बजे के करीब होगी। ग्रहण दोपहर 12:02 बजे अपने पूर्ण प्रभाव में होगा और इसकी समाप्ति दोपहर 01:49 बजे होगी। देश के अन्य शहरों में ग्रहण के समय में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, किसी भी पूर्ण ग्रहण के शुरू होने से 12 घंटे पहले और ग्रहण के 12 घंटे बाद का समय ग्रहण सूतककाल कहलाता है। मान्यता है कि इस दौरान मंदिरों में पूजा पाठ या कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। सूतककाल समाप्त होने के बाद ही मंदिर खुलते हैं और लोग पूजा अनुष्ठान शुरू करते हैं। इस ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा। जिसकी शुरुआत ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले हो जाएगी। सूतक 20 जून की रात 09:52 बजे से लग गया है।

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ये ग्रहण न ही आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और न ही पूर्ण सूर्यग्रहण, क्योंकि चन्द्रमा की छाया सूर्य का करीब 99% भाग ही ढकेगी। आकाशमण्डल में चन्द्रमा की छाया सूर्य के केन्द्र के साथ मिलकर सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति बनायेगी। जिससे सूर्य आसमान में एक आग की अंगूठी की तरह नजर आएगा। साल के सबसे बड़े दिन पर ये ग्रहण लगने जा रहा है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है और सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेता है तो इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप सूर्य का घेरा एक चमकती अंगूठी की तरह दिखाई देता है।

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चंद्रमा की तरह सूर्य ग्रहण खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इसका बुरा असर आपकी आंखों पर पड़ सकता है। सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तकनीक या तो एल्युमिनेटेड मायलर, ब्लैक पॉलिमर, शेड नंबर 14 के वेल्डिंग ग्लास या टेलिस्कोप द्वारा सफेद बोर्ड पर सूर्य की इमेज को प्रोजेक्‍ट करके करके उचित फिल्टर का उपयोग करके देखा जा सकता है।

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