HomeHindi Newsभारत की डीएनए वैक्सीन की दुनिया ने की तारीफ, नेचर जर्नल में...

भारत की डीएनए वैक्सीन की दुनिया ने की तारीफ, नेचर जर्नल में दावा- इस तकनीक से बन सकती है कैंसर की वैक्सीन

पूरी दुनिया कोरोना के खिलाफ डीएनए तकनीक पर बनी स्वदेशी वैक्सीन की दीवानी हो गई है। Zydus Cadila की वैक्सीन Zykov-D पहली डीएनए वैक्सीन है जो न केवल कोरोना के खिलाफ बल्कि दुनिया में किसी भी बीमारी के खिलाफ बनाई गई है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि डीएनए तकनीक पर आधारित यह वैक्सीन भविष्य में कैंसर जैसी जटिल बीमारी के लिए वैक्सीन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद पिछले महीने इसके आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी थी।

द नेचर जर्नल ने टीकों की दुनिया में जयकोव-डी के महत्व के बारे में एक लंबा लेख प्रकाशित किया है। उनके मुताबिक 1990 से पूरी दुनिया में विभिन्न बीमारियों के लिए डीएनए वैक्सीन बनाने के प्रयास चल रहे थे, लेकिन भारत की जाइडस कैडिला को पहली बार सफलता मिली है।

World praises India's DNA vaccine, claims in Nature Journal – Cancer vaccine can be made with this technology

करीब 28 हजार लोगों पर किए गए ट्रायल में जयकोव-डी कोरोना संक्रमण को रोकने में 67 फीसदी कारगर रहा है। यह साबित हो चुका है कि डीएनए तकनीक पर आधारित वैक्सीन केवल प्रयोगशाला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक रूप से बीमारियों को रोकने में भी सक्षम है।

जर्नल नेचर ने डीएनए वैक्सीन को आरएनए वैक्सीन से बेहतर करार दिया है। मॉडर्ना ने कोरोना के खिलाफ आरएनए तकनीक पर आधारित वैक्सीन तैयार की है। लेख में कहा गया है कि डीएनए वैक्सीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्य तापमान पर स्थिर रहता है, जबकि आरएनए वैक्सीन को -20 से -80 डिग्री के तापमान रेंज में रखना पड़ता है।

आरएनए वैक्सीन को कोरोना के खिलाफ 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी पाया गया है, लेकिन उनका परीक्षण कोरोना के डेल्टा संस्करण के आने से पहले हुआ था, जिसके दौरान यह अपेक्षाकृत कम संक्रामक था, जबकि जयकोव-डी ने अपनी प्रभावशीलता साबित की है। संक्रामक डेल्टा संस्करण।

इस तकनीक में शरीर के डीएनए का उपयोग करके प्रतिरक्षा प्रोटीन विकसित किए जाते हैं। यह प्रोटीन वायरस के संक्रमण को रोकता है और शरीर की कोशिकाओं को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाता है।

नेचर ने अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में विस्टर इंस्टीट्यूट में वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी सेंटर के निदेशक डेविड वेनर के हवाले से कहा कि डीएनए तकनीक पर आधारित एक वैक्सीन जटिल प्रोटीन या कई प्रोटीनों के संयोजन का उपयोग कर सकती है। इससे कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का टीका बन सकता है।

नेचर के मुताबिक इस समय पूरी दुनिया में कोरोना के खिलाफ करीब एक दर्जन डीएनए वैक्सीन पर काम चल रहा है। जिनमें से जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी और अमेरिका के इनिवियो एंड पार्टनर्स के टीके क्लिनिकल ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण में हैं। जबकि Zydus Cadila की Jaycov-D इसी महीने भारत के टीकाकरण अभियान में शामिल होगी।